:
Breaking News

Samastipur Flood: समस्तीपुर के तीन प्रखंडों में 2.33 लाख लोग बाढ़ की चपेट में, 58 सामुदायिक रसोई और 192 नावें राहत में जुटीं

top-news
https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | समस्तीपुर के मोहनपुर, मोहिउद्दीननगर और विद्यापतिनगर प्रखंडों में बाढ़ प्रभावित 2.33 लाख लोगों तक भोजन, स्वास्थ्य सुविधा और राहत सामग्री पहुंचाने का अभियान जारी है।

समस्तीपुर, 7 सितंबर। जिले के बाढ़ प्रभावित मोहनपुर, मोहिउद्दीननगर और विद्यापतिनगर प्रखंडों में हालात को देखते हुए प्रशासन ने राहत और बचाव अभियान को तेज कर दिया है। इन तीनों प्रखंडों में करीब 2 लाख 33 हजार 212 लोग बाढ़ से प्रभावित बताए गए हैं। पानी से घिरे इलाकों में लोगों तक भोजन, दवा, आश्रय और अन्य जरूरी सामान पहुंचाने के लिए प्रशासन की ओर से अलग-अलग स्तर पर इंतजाम किए गए हैं।

बाढ़ की स्थिति के बीच सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित परिवारों तक नियमित भोजन पहुंचाना है। इसके लिए तीनों प्रखंडों में 58 सामुदायिक रसोई संचालित की जा रही हैं। इन रसोइयों से अब तक करीब 25,858 लोगों को भोजन उपलब्ध कराया जा चुका है। प्रशासन की ओर से रसोई व्यवस्था की निगरानी भी की जा रही है, ताकि प्रभावित लोगों को स्वच्छ और गुणवत्तापूर्ण भोजन मिल सके।

बाढ़ के पानी के कारण जिन परिवारों के घरों में रहना मुश्किल हो गया है, उनके लिए अस्थायी सुरक्षा की व्यवस्था भी की जा रही है। प्रशासन के अनुसार अब तक 31,398 पॉलिथीन शीट बांटी जा चुकी हैं। इनका इस्तेमाल प्रभावित परिवार बारिश और बाढ़ के बीच अस्थायी आश्रय के तौर पर कर रहे हैं।

स्वास्थ्य मोर्चे पर भी प्रशासन ने इंतजाम बढ़ाए हैं। प्रभावित इलाकों में 18 मेडिकल कैंप संचालित किए जा रहे हैं। इन शिविरों में लोगों की स्वास्थ्य जांच के साथ चिकित्सकीय सलाह और जरूरी दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीमों को लगातार प्रभावित इलाकों में सक्रिय रहने और जरूरत के अनुसार तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने को कहा गया है।

बाढ़ का असर सिर्फ लोगों तक सीमित नहीं है। बड़ी संख्या में पशुधन भी प्रभावित क्षेत्रों में फंसा हुआ है। पशुओं को सुरक्षित रखने के लिए 17 पशु राहत/शेड कैंप बनाए गए हैं। पशुपालकों की जरूरत को देखते हुए चारा और भूसा उपलब्ध कराया जा रहा है। प्रशासन के आंकड़ों के मुताबिक अब तक 216 क्विंटल भूसा और पशु चारा वितरित किया जा चुका है।

पशुओं के इलाज के लिए भी 17 पशु चिकित्सा कैंप चलाए जा रहे हैं। इन शिविरों के जरिए अब तक 264 पशुओं को दवा और उपचार उपलब्ध कराया गया है। पशु चिकित्सा दलों को प्रभावित गांवों में लगातार भ्रमण कर बीमार या घायल पशुओं का उपचार करने का निर्देश दिया गया है।

बाढ़ के बीच आवागमन व्यवस्था बनाए रखना भी प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती है। पानी से घिरे इलाकों में लोगों की आवाजाही और राहत सामग्री की आपूर्ति के लिए 192 नावों का परिचालन किया जा रहा है। इन नावों के जरिए प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के साथ खाद्य सामग्री, दवा और दूसरी जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति भी की जा रही है।

जिले में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए प्रशासन की निगरानी लगातार जारी है। प्रभावित इलाकों में अधिकारियों और राहत दलों को सक्रिय रखा गया है। जरूरत वाले स्थानों पर अतिरिक्त राहत व्यवस्था बढ़ाने की तैयारी भी की जा रही है। प्रशासन की प्राथमिकता फिलहाल लोगों की सुरक्षा के साथ-साथ भोजन, चिकित्सा, अस्थायी आश्रय और पशुधन की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

समस्तीपुर के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति राज्य में बने व्यापक बाढ़ संकट का भी हिस्सा है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार राज्य के कई जिलों में नदियों के जलस्तर में वृद्धि के बाद राहत और बचाव व्यवस्था को व्यापक स्तर पर बढ़ाया गया है। �

The Indian Express +1

प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि बाढ़ के दौरान अनावश्यक जोखिम न लें और पानी से घिरे क्षेत्रों में जाने से बचें। नाव से आवागमन करते समय सुरक्षा निर्देशों का पालन करने, नाव पर क्षमता से अधिक लोगों के सवार न होने और किसी भी आपात स्थिति में स्थानीय प्रशासन अथवा नियंत्रण कक्ष से संपर्क करने की सलाह दी गई है।

आंकड़ों में राहत अभियान

2,33,212 लोग बाढ़ से प्रभावित

58 सामुदायिक रसोई संचालित

25,858 लोगों को भोजन उपलब्ध

31,398 पॉलिथीन शीट वितरित

18 मेडिकल कैंप सक्रिय

17 पशु राहत/शेड कैंप

216 क्विंटल पशु चारा/भूसा वितरित

17 पशु चिकित्सा कैंप संचालित

264 पशुओं को चिकित्सा सुविधा

192 नावें राहत एवं बचाव में लगाई गईं

यह भी पढ़ें

समस्तीपुर में गंगा-बाया के उफान से बढ़ी मुश्किलें, कई गांव बाढ़ की चपेट में

बाढ़ प्रभावित इलाकों में नाव बनी लाइफलाइन, प्रशासन ने बढ़ाई निगरानी

तस्वीर के लिए सुझाव

मुख्य फोटो: बाढ़ के पानी में नाव से लोगों का आवागमन।

दूसरी फोटो: बाढ़ प्रभावित गांव/जलमग्न इलाका।

तीसरी फोटो: राहत या सामुदायिक रसोई में भोजन तैयार करते लोग।

चौथी फोटो: मेडिकल या पशु चिकित्सा कैंप।

संपादकीय टिप्पणी

बाढ़ के समय सरकारी आंकड़ों से ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि राहत वास्तव में अंतिम व्यक्ति तक कितनी तेजी और प्रभावी तरीके से पहुंच रही है। समस्तीपुर के तीन प्रखंडों में 2.33 लाख से अधिक लोगों का प्रभावित होना बताता है कि चुनौती काफी बड़ी है। 58 सामुदायिक रसोई और 192 नावों का संचालन राहत व्यवस्था के बड़े स्तर को दर्शाता है, लेकिन पानी से घिरे दूरदराज के गांवों तक नियमित पहुंच बनाए रखना सबसे जरूरी होगा।

भोजन और पॉलिथीन शीट तत्काल जरूरत पूरी कर सकते हैं, लेकिन लंबे समय तक बाढ़ रहने पर पेयजल, स्वच्छता, स्वास्थ्य और पशुओं के चारे की समस्या गंभीर रूप ले सकती है। इसलिए मेडिकल टीमों और पशु चिकित्सा दलों की लगातार मौजूदगी जरूरी है। साथ ही नावों के परिचालन में सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी।

प्रशासन की सक्रियता के साथ स्थानीय स्तर पर पंचायत प्रतिनिधियों, स्वयंसेवी समूहों और ग्रामीणों के बीच बेहतर समन्वय राहत अभियान को और प्रभावी बना सकता है। बाढ़ के दौरान सबसे कमजोर परिवारों—बुजुर्गों, बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बीमार लोगों—तक प्राथमिकता के आधार पर सहायता पहुंचाना भी जरूरी है।

https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *